साधारण विवाह
विवाह में प्रचलित वर्तमान परंपरा को त्यागना पड़ेगा ।
जैसे बेटी के विवाह में बड़ी बरात का आना दहेज देना यह व्यर्थ परंपरा है जिस कारण से बेटी परिवार पर भार मानी जाने लगी हैं और उसको गर्भ में ही मारने का सिलसिला शुरू हैं जो माता-पिता के लिए महापाप का कारण बनता है बेटी देवी का स्वरूप है हमारी परंपराओं ने बेटियों को दुश्मन बना दिया श्री देवी पुराण के तीसरे स्कंद में प्रमाण है कि वह ब्रह्माण्ड के प्रारम्भ में तीनों देवताओं श्री ब्रह्मा जी श्री विष्णु तथा श्री शिव जी का जब उनके माता श्री दुर्गा जी ने विवाह किया उस समय न कोई बराती था। ना कोई भाती था। ना कोई भोजन भंडारा किया गया था। ना डीजे बजा था ना कोई नृत्य किया था श्री दुर्गा जी ने अपने बड़े पुत्र श्री ब्रह्मा जी से कहा कि हे ब्रह्मा सावित्री नाम की लड़की तुझे तेरी पत्नी रूप में दी जाती है इसे ले जाओ और अपना घर बसाओ इसी प्रकार अपने दूसरे पुत्र श्री विष्णु जी को लक्ष्मी जी तथा छोटे बेटे श्री शिवजी को पार्वती को देकर कहा कि यह तुम्हारी पत्नियां हैं उनको ले जाओ और अपना घर बचाओ तीनों अपनी-अपनी पत्नियों को लेकर अपने-अपने रूप में चले गए जिससे विश्व का विस्तार हुआ। तो उस टाइम विवाह पर कितना साधारण रूप से किया गया इसी प्रकार अभी भी विवाह कम खर्चे बिना दिखावे का साधारण होना चाहिए।
इस तरह की परंपरा को त्यागने हैं क्योंकि जीवन के सफर में व्यर्थ का भार हैं। युवाओं से निवेदन है कि दूसरों के देखा देखी में अपने माता-पिता तथा समाज में विष ना गोले विवाह करना अच्छी बात है बकवास करना बुरी बात है बिना दहेज बिना आडंबर का विवाह होना चाहिए जो पूर्ण परमात्मा को साक्षी मानकर और अपने माता पिता के संस्कारों को देखकर एक साधारण सा विवाह करना चाहिए जिस कारण से दोनों परिवार सुखी रहे और विवाह करने वाले दंपति भी अपना सुखी जीवन जी सकें संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयाई अपने गुरु जी की आज्ञा मानकर बिना खर्चे की बिना दहेज बिना बराती की 17 मिनट में विवाह का करते हैं और एकदम सुखी जीवन जीते हैं।
इन सबका समाधान है कि विवाह को सूक्ष्म वेद के अनुसार किया जाए। आप जी ने चार वेद सुने हैं:- यजुर्वेद ऋग्वेद सामवेद तथा अथर्ववेद। परंतु पांचवा वेद सूक्ष्म वेद है जो स्वयं पूर्ण ब्रह्म जी ने पृथ्वी पर प्रकट होकर अपने मुख कमल से अमृतवाणी द्वारा प्रदान किया है। और संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयाई उसी पांचवे वेद के अनुसार विवाह रस्म करते हैं जिसमें कोई पुरानी परंपराओं की आवश्यकता नहीं पड़ती। विवाह पर तथा अन्य अवसरों पर लड़की लड़के वाले पक्ष का कोई खर्च नहीं करना होता है।
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