नशा करता है सर्वनाश
नशा चाहे शराब, सुल्फा, अफीम, हिरोईन आदि-आदि किसी का भी करते हो, यह आपका सर्वनाश का कारण बनेगा।
यह मानव समाज को बर्बाद कर रहा है।
सुरापान मद्य मांसाहारी, गवन करे भोगे पर नारी।
सत्तर जन्म कटत हैं शीशम, साक्षी साहिब हैं जगदीशम।।
सुरापान व मांस आदि खाने का अंजाम जब इतना बुरा है तो इससे त्यागने में ही भलाई है।
मदिरा(शराब) पीवे कड़वा पानी,
सत्तर जन्म कुत्ते के जानी।।
शराब पीने से 70 जन्म तक कुत्ता बनने की सजा मिलेगी।
नशा करने वाला व्यक्ति इंसान इंसान नहीं रहता है इंसान से पशु जैसी हरकतें करने लगता है उसके सामने मां बहन भाई कोई दिखाई नहीं देता है उसको सिर्फ एक ही वस्तु दिखाई देती है नशा नशा करने वालों ने अपने ही परिवार वालों का ही कत्ल कर देते हैं कहने का मतलब नशे करने वाला व्यक्ति इंसान से राक्षस बन जाता है नशा मानव समाज के लिए नाश का कारण है नहीं तो नशा करने वाला व्यक्ति सुखी होता है और नहीं उनके परिवार वाले नहीं समाज वाले हर समय सभी दुखी रहते हैं।
नशा करने वाला व्यक्ति कैसा भी नशेड़ी हो और वह व्यक्ति पूर्ण संत के द्वारा की गई सत्संग सुनने मात्र से उनके विचार बदल जाते हैं और नशे से घृणा होने लगती है क्योंकि संतों ने तथा परमात्मा ने इस नशे को बहुत बुरा बताया है इससे लोक तथा परलोक दोनों जगह कष्ट भोगना पड़ता है नशा करने वाले मानव समाज से विनम्र प्रार्थना है कि संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग सुनें और नाम उपदेश लेकर सत भक्ति करने से नशा अपने आप छूट जाता है और अपना जीवन सुखी जीओ तथा परिवार वाले भी सुखी करो।
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