मांस खाना महापाप है
कबीर, दिनको रोजा रहत हैं, रात हनत हैं गाय।
यह खून वह वंदगी, कहुं क्यों खुशी खुदाय।।
परमात्मा कबीर जी कहते हैं कि मुस्लिम दिन में तो रोजा रखते हैं और रात में गाय का मांस खाते हैं। यह जीव हत्या है, यह अल्लाह की बन्दगी नहीं है। फिर अल्लाह इससे खुश क्यों होगा?
गरीब, जीव हिंसा जो करते हैं, या आगे क्या पाप। कंटक जुनी जिहान में, सिंह भेड़िया और सांप।।
जो जीव हिंसा करते हैं उससे बड़ा पाप नहीं है। जीव हत्या करने वाले वे करोड़ो जन्म शेर, भेड़िया और साँप के पाते हैं।
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